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प्राक्कथन

अपनी इस नई वेबसाइट पर मैं व्‍यक्तिगत रूप से और अपने भा पे सं ‍परिवार की ओर से आपका अभिनंदन करता हूँ। हजारों मीलों की यात्रा भी एक पहले कदम से शुरू होती है; यह स्‍वर्णिम पहल 14 अप्रैल, 1960 को की गई थी।

तब से ही, हमारे कई वैज्ञानिकों व कर्मचारियों तथा हमारे पूर्ववर्ती निदेशकों ने वास्‍तव में एक मजबूत नींव रखने में कड़ी मेहनत की है; एक ऐसी नींव जिससे हम अपने अंशधारकों की अपेक्षाओं को मात्र पूरा ही नहीं कर सके, बल्कि उन अपेक्षाओं से आगे भी बढ़ सके हैं। सीएसआइआर-भारतीय पेट्रलियम संस्‍थान के 52 वर्ष, वै. औ. अ. प. भा. पे. सं. के इतिहास में कई प्रभावोत्‍पादक उदाहरणों से भरे पड़े हैं। तेल उद्योग को अपने शैशव से आज विश्‍व के चौथे सबसे बड़े उद्योग-जिसमें प्रतिवर्ष 218 मि. ट. कच्‍चे तेल का प्रक्रमण करने वाली 22 परिष्‍करणियों की एक पूरी शृंखला शामिल है- का दर्जा दिलवाने में हमने असीमित योगदान किया है।

‍हमें यह उल्‍लेख करते हुए सदैव गौरव की अनुभूति होती है कि हमारे देश में प्रत्‍येक परिष्‍करणी के पास वै. औ. अ. प-भा.पे.सं. की कोई-न-कोई प्रौद्योगिकी, या उत्‍पाद, या सेवा अवश्‍य है। वै. औ. अ. प.-भा.पे.सं. मौलिक अनुसंधान से प्रौद्योगिकियों का विकास कर उनका वाणिज्‍यीकरण करवाने में एक वांछनीय पृष्‍ठभूमि वाला संस्‍थान है। हमने भविष्‍यलक्षी मौलिक अनुसंधान संचालित करने और फिर उसको अनुप्रयोगों में ढालने के लिए आवश्‍यक अवसंरचना विकसित की है; इससे प्रौद्योगिकी, प्रक्रम डिजाइन और उसके मान-विस्‍तार का मार्ग भी प्रशस्‍त होता है। पिछले 20 वर्षों में, हमने एक सुविचारित निर्णय लिया है कि विदेशों में अवसर तलाशें और हमें विदेशों में अध्‍ययन संचालित करने, पुनर्सज्‍जा की कार्रवाई करने और साथ ही तृणमूल इकाइयों को अनुज्ञप्‍त करने में बड़ी सफलता हासिल हुई है। रीतते हुए हाइड्रोकार्बन संसांधनों को दृष्टिगत रखते हुए हमने अपने अनुसंधान में विविधता का समावेश करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रूख किया है; विशेषत: जैव-ईधनों जैसे डीजल, जैव-जैव एथनॉल, जैव-जेट ईंधन और जैव-मात्रा का वाणिज्यिक परिवहन ईंधनों में सीधे रूपांतरण करने की ओर।

ग्‍यारवीं पंचवर्षीय योजना में यह हमारा मुख्‍य केंद्र बिंदु रहा है। अब जबकि हम बारहवीं पंचवर्षीय योजना में प्रवेश कर रहे हैं, हमने नए क्षेत्रों की पहचान की है, जिनकी परास यथेष्‍ट एवं स्‍वच्‍छ ईंधन, प्रगत पदार्थ, रणनीतिक पदार्थ, संधारणीय रासायनिक उद्योग, जिसमें सम्मिलित हैं कई उप-क्षेत्र जैसे ऊर्जा-दक्ष प्रौद्योगिकियां, संधारणीय ऊर्जा के लिए उत्‍प्रेरक, नव-पीढ़ी स्‍नेहक एवं योज्‍य, जैव-मात्रा से ऊर्जा, विशिष्‍टता रसायनों हेतु उत्‍प्रेरक, उर्त्‍सजन घटाने से संबंधित शोधात्‍मक पहल, प्रगत कार्बन पदार्थ, एवं अपशिष्‍ट से धन-संचय- इन विषयों तक है। हमने नव-पीढ़ी फोटोवोल्‍टीय सेलों पर अनुसंधान में भी कुछ नए प्रयास किए हैं। अनुसंधान की वर्तमान परिष्‍क़ृत अवस्‍था के चलते, यह स्‍पष्‍ट है कि विश्‍व-स्‍तरीय शोध-परिणामों को प्राप्‍त करने के लिए रणनीतिक साझेदारी और सहयोग खड़ा करने की आवश्‍यकता है। इसे मध्‍य-नजर रखते हुए हमने भारत और विदेशों में भी अनुसंधान संगठनों, विश्‍वविद्यालयों और संस्‍थानों के साथ रणनीतिक सहयोग निर्मित किया है। इस सहयोग से हमारे अनुसंधान को असीमित मान मिला है और हम नए-नए क्षेत्रों में अन्‍वेषण करने के लिए नई साझेदारियों की सदैव तलाश में रहते हैं।

संस्‍थान के अधिदेशों में से एक है, तेल उद्योग के मानव संसाधन को प्रशिक्षित और विकसित करना। 1960 से ही हमने इन क्षेत्रों/विषयों पर कई प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं- परिष्‍करण, पेट्रोरसायन, वैश्‍लेषिक विज्ञान जिसमें तेल उद्योग के लिए सामयिक अभिरूचि के क्षेत्रों से संबंधित विशेष विषय भी शामिल हैं। पिछले 52 वर्षों में, हमने सार्वजनिक और निजी - दोनों क्षेत्रों के 7,000 से अधिक इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया है और हमें यह कहते हुए गर्व है कि तेल उद्योग के लगभग हर एक रासायनिक इंजीनियर ने हमारे एक या अधिकप्रशिक्षण-पाठयक्रमों में भाग लिया है। मैं, अपने वर्तमान के और पूर्व के वैज्ञानिकों और अधिकारियों के प्रति हार्दिक धन्‍यवाद और प्रशंसा व्‍यक्‍त करता हूं कि उन्‍होंने इस संस्‍थान को आज इस स्‍तर तक पहुंचाया है साथ ही यह भी सच है कि अंशधारकों, ग्राहकों, अनुज्ञापियों और शुभचिंतकों से मिले दृढ़ अवलंब और विश्‍वास के बिना यह संभव नहीं था। इस हेतु मैं आपका धन्‍यवाद करता हूं।

एम. ओ.गर्ग
निदेशक
 

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